संस्थापकThe founder

सैनिक शिरोमणि
मनोज ध्यानी
मुकुंद कृष्ण दास
उपाधि से सैनिक, नाम से भक्त, और तीन दशकों से हिमालय के लिए आंदोलनकारी। 1996 में उन्होंने छात्र और युवा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए नॉर्थ ब्लॉक में ब्लूप्रिंट ऑफ़ उत्तराखंड प्रस्तुत किया। यह राज्य निर्माण का ऐसा प्रस्ताव था जिसने हर विकास मॉडल के केंद्र में पर्वतीय पारिस्थितिकी को रखा, और हिमालय संसाधन केंद्र व वन बचाने वालों के लिए ग्रीन बोनस की माँग की।
वे श्रीनगर गढ़वाल में अलकनंदा पर श्रीयंत्र टापू आंदोलन के अग्रणी सैनिक रहे, और अभियान के ब्लॉग एक हिमालय पर हिमालयी चिंतन और दर्शन पर लिखते हैं। विश्व पर्वत दिवस 2023 पर उन्होंने मुख्यमंत्री को खुला पत्र भेजा, जिसमें सिल्क्यारा सुरंग हादसे को पहाड़ का अपना संदेश बताया: समय रहते सावधान हो जाओ।
हिमालय का हम सबके लिए एक साफ़ संदेश है: समय रहते सावधान हो जाओ।
तीस वर्षThirty years
रामपुर तिराहा, 2 अक्टूबर। आंदोलन का निर्णायक मोड़। हर वर्ष वे इसके शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं।
श्रीयंत्र टापू, श्रीनगर गढ़वाल। 36 दिन का अनशन, 10 नवंबर की कार्रवाई, अलकनंदा तट पर लापता साथियों की तलाश।
गृह मंत्रालय, नई दिल्ली में ब्लूप्रिंट ऑफ़ उत्तराखंड प्रस्तुत।
देहरादून में वृक्षबंधन अभियान पंजीकृत।
मुख्यमंत्री को खुला पत्र: सिल्क्यारा में छिपी है हिमालय की पीड़ा।